JANTA KI PUKAR

बदायूं के पोस्टमार्टम कांड में एक और करतूत सामने आई है। मृतका के भाई ने आरोप लगाया कि बहन के शव से आंखें निकालने के बाद बालों से ढक दिया गया था। उन्होंने जब बाल हटाए तो इसका पता चला। इसके बाद ही वे लोग शिकायत करने पहुंचे थे। बदायूं में महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की एक और करतूत सामने आई है। आंखें निकाले जाने से खाली हुई जगह को पूजा की चोटी से ढक दिया गया था। यही नहीं, चोटी को घुमाकर पीछे की तरफ बांध भी दिया था, ताकि वह खुले नहीं। यह आरोप भाई राजकुमार ने पुलिस को दिए बयान में लगाया है।आंखें निकालने के मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही रोजाना नई करतूतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि मायके वालों को शव घर पहुंचने पर यह एक और करतूत पता चली। पहले परिवार वाले समझते रहे कि किसी तरह बाल चेहरे पर आ गए होंगे। बालों की वजह से उन्हें पूजा का चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। मृतका के भाई राजकुमार के मुताबिक बॉडीबैग खोलकर जैसे ही बाल हटाना चाहा तो चोटी पीछे की ओर बंधी हुई थी। इसे खोलकर बाल हटाए तो दोनों आंखें न देखकर परिजन हैरान रह गए। इसी के बाद परिजन शिकायत करने के लिए डीएम कार्यालय पहुंचे। भाई राजकुमार का कहना है कि डॉक्टरों ने ही गड्ढों को छुपाने के लिए उन्हें बालों से ढका।

 

बाल नहीं हटाते तो नहीं खुलती पोल
ससुराल में पूजा की मौत के बाद शव सीधे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। इसलिए मायके के काफी लोग पूजा का चेहरा नहीं देख पाए थे। पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाने की जल्दी थी, इसलिए सभी लोगों से कह दिया गया था कि घर पहुंचकर चेहरा देख लें।

यही वजह है कि घर पहुंचते ही चेहरा खोला गया। राजकुमार के अनुसार अगर बहन के चेहरे से बाल नहीं हटाए जाते तो शायद आंखों के गायब होने की बात सामने नहीं आती। अंतिम संस्कार हो जाता और डॉक्टरों की करतूत बालों के पीछे ही छिपी रह जाती।

जांच रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषी बताया
शव से आंखें निकालने के मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों के बोर्ड ने जांच रिपोर्ट शनिवार देर शाम डीएम को सौंप दी। सूत्र बताते हैं कि इसमें कर्मचारियों ने डॉक्टरों के सिर पर ही ठीकरा फोड़ा है।

बोर्ड के सदस्यों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान एक कर्मचारी ने बताया कि महिला की आंखें गायब होने के संबंध में डॉक्टरों और फार्मासिस्ट को भलीभांति जानकारी थी।

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