JANTA KI PUKAR

बदायूँ : 08 नवम्बर। जिला कृषि अधिकारी डी0के0 सिंह ने अवगत कराया है कि रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा पी0एम0 प्रणाम योजना प्रस्तावित की गयी है, जिसके तहत यूरिया, डी0ए0पी0, पोटाश उर्वरकों के प्रयोग को वैज्ञानिक संस्तुतियों के आधार पर करते हुए उनके स्थान पर अन्य उर्वरकों जैव उर्वरकों/नैनों उर्वरकों का प्रयोग किये जाने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जाना है, क्योकि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा, वायु, जल प्रदूषण में भारी वृद्धि हो रही है, जिसके परिणाम स्वरूप मानव, पशुओ एवं फसलों को हानिकारक प्रभाव का सामना करना पड रहा है। एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन करते हुए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित मात्रा में फसलों की आवश्यकता के अनुसार उपयोग किया जाये, जैविक एवं प्राकृतिक खेती बढाकर जैव उर्वरकों/नैनो उर्वरकों को बढावा दिया जाये।
उन्होंनें बताया कि यूरिया के विकल्प हेतु विभिन्न विधियों को अपनाया जा सकता है जैसे सरकार द्वारा नैनो तरल यूरिया विकसित किया गया है, जिसका प्रयोग करने से यूरिया की कुल मात्रा में 40 प्रतिशत की कमी होगी। 40-45 दिन की फसल अवस्था जब फसल में पत्तियां निकलने पर द्धितीय एवं तृतीय टॉप ड्रेसिंग नैनो यूरिया से करने पर उत्पादन दानेदार यूरिया के समान ही प्राप्त हुआ है। सामान्य यूरिया की अपेक्षा नैनो तरल यूरिया की उपयोग क्षमता 85-90 प्रतिशत होती है। सरकार द्वारा सल्फर कोटेड यूरिया (गोल्ड यूरिया) की दक्षता 70-75 प्रतिशत होती है, साथ ही यूरिया धीरे-धीरे घुलती है, जिससे फसल को लम्बे समय तक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे फसल में उत्पादन अधिक मिलता है। इसमें 37 प्रतिशत नाइट्रोजन और 17 प्रतिशत सल्फर की मात्रा उपलब्ध होती है। इससे फसलों में सल्फर की आपूर्ति भी होगी।
डी0ए0पी0 के वैकल्पिक उर्वरक हैं एस0एस0पी0 (सल्फर-11 प्रतिशत, फास्फोरस-16 प्रतिशत एवं कैल्शियम-19 प्रतिशत), एन0पी0के0/एन0पी0एस0, फास्फेट रिच आर्गेनिक मैन्योर (प्रोम), नैनो डी0ए0पी0 डी0ए0पी0 उर्वरक के साथ-साथ हमें इन उर्वरकों का प्रयोग भी करना चाहिए जो मृदा में फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर पोटेशियम एवं कैल्शियम आदि तत्व भी उपलब्ध कराते है जो तोरिया/राई सरसों एवं आलू आदि के लिये यह फास्फेटिक उर्वरक डी0ए0पी0 से भी अधिक लाभकारी हैं।
उन्होंने जैव उर्वरकों को बढावे के बारे मे बताया कि कृषक भाई दलहनी फसलों की बुवाई के पूर्व राइजोबियम एवं खाद्यान्न फसलों की फसलों की वुवाई के पूर्व बीजों को एजोटोबैक्टर कल्चर से उपचारित/शोधित अवश्य कर लें, क्योकि इससे पौधों जडों में वायुमण्डल से नाइट्रोजन ग्रहण करने की क्षमता का विकास होता है।
उन्होंने हरी खाद व गोवर व कम्पोस्ट खाद का प्रयोग करने के बारे में बताया कि कृषक बन्धु हरी खाद के रूप में ढैचा/सनई आदि खेत में तैयार कर उन्हें खेत में पलटकर जोत दे, साथ ही गोवर/कम्पोस्ट की खाद तैयार कर खेत में प्रयोग करें, जिससे खेत में जीवांश कार्वन बढता है और रासायनिक उर्वरकों की खपत में कमी आती है।
उन्होंने बताया कि आलू की संस्तुत एन0पी0के0 150ः100ः40, यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 06, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 04, गेहूँ की संस्तुत एन0पी0के0 120ः60ः40, यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 05, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 03, सरसों की संस्तुत एन0पी0के0 80ः40ः40, यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 04, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 02,  मटर की संस्तुत एन0पी0के0 40ः60ः40, यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 01, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 03, चना/मसूर की संस्तुत एन0पी0के0 20ः40ः20, यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 0, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 02, गन्ना की संस्तुत एन0पी0के0 100ः90ः90 यूरिया बैग प्रति हेक्टेयर 07, डी0ए0पी0 बैग प्रति हेक्टेयर 04 फसलों हेतु उर्वरक की संस्तुत मात्रा का निर्धारित की गई है।

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